Q.1 निम्नलिखित में से क्या त्रीभन्गी नृत्य में शामिल है ? 1) सिर का स्वतंत्र घुमना 2) पैर का मुद्रांकन 3) छाती और कमर का स्वतंत्र घुमना Codes: A) 1 & 3 B) 2 & 3 C) 1 & 2 D) 1,2,3 Ans. D Q.2 भारतीय नृत्य परंपरा सत्रिया के संदर्भ में निम्न्लिखित बयानों पर विचार करें - 1) सत्रिया नृत्य अन्किआ नाट की एक संगत है (असमिया एक अधिनियम नाटकों का एक रूप है) 2) यह आमतौर पर सत्रास में प्रदर्शन किया जाता है Codes: A) Only 1 B) Only 2 C) Both are correct D) Both are incorrect Ans. C Q.3 निम्नलिखित में से क्या सही है? 1) सूफियों ने कुरान और सुन्ना की व्याख्या करने की परिभाषाएँ और सिद्धांतवादी शैक्षिक तरीकों की आलोचना की जो धर्मशास्त्रियों द्वारा अपनाये गए हैं 2) सूफियों ने अपने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर कुरान की एक व्याख्या की मांग की. A) Only 1 B) Only 2 C) Both are correct D) Both are incorrect Ans. C Q.4 माउंटबेटन योजना निम्न में से किसके बारे में थी ? A) संविधान सभा के द्वारा भारत के लिए संविधान के गठन के दिशा निर्देश के लिए B) एक संघीय सरकार के निर्माण के बारे में C) एक ही समय में पूरे भारत में भड़के सांप्रदायिक दंगों को नियंत्रित करने की एक योजना D) एक ढंग जिसके द्वारा सत्ता अंग्रेजों द्वारा भारतीय हाथ में हस्तांतरित हो गयी Ans. D

माउन्टबेटन योजना 3 जून, 1947 ई. को लॉर्ड माउन्ट बेटन द्वारा प्रस्तुत की गई थी। यह योजना भारत के जनसाधारण लोगों में 'मनबाटन योजना' के नाम से भी प्रसिद्ध हुई। 'मुस्लिम लीग' पाकिस्तान के निर्माण पर अड़ी हुई थी। विवशतापूर्वक कांग्रेस तथा सिक्खों द्वारा देश के विभाजन को स्वीकार कर लेने के बाद समस्या के हल के लिए लॉर्ड माउन्ट बेटन लन्दन गये और वापस आकर उन्होंने योजना प्रस्तुत की। मुस्लिम लीग की जिद 24 मार्च, 1947 ई. को लॉर्ड माउन्ट बैटन भारत के वायसराय बनकर आये। पद ग्रहण करते ही उन्होंने 'कांग्रेस' एवं 'मुस्लिम लीग' के नेताओं से तात्कालिक समस्याओं पर व्यापक विचार विमर्श किया। 'मुस्लिम लीग' पाकिस्तान के अतिरिक्त किसी भी विकल्प पर सहमत नहीं हुई माउन्ट बेटन ने कांग्रेस से देश के विभाजन रूपी कटु सत्य को स्वीकार करने का अनुरोध किया। कांग्रेस नेता भी परिस्थितियों के दबाव को महसूस कर इस सत्य को स्वीकार करने क लिए तैयार हो गये। विभाजन को स्वीकार करने की कांग्रेसियों की विवशता सरदार वल्लभ भाई पटेल के इस वक्तव्य से ज़ाहिर होती है। इस सम्बन्ध में पटेल ने कहा- "यदि कांग्रेस विभाजन स्वीकार न करती तो एक पाकिस्तान के स्थान पर कई पाकिस्तान बनतें।" सिक्खों ने भी इस योजना को अनमने ढंग से स्वीकृत दे दी। योजना की मुख्य बातें 18 मई, 1947 ई. को माउन्ट बेटन समस्या के अन्तिम हल के लिए ब्रिटिश सरकार से बातचीत हेतु लन्दन गये और पुनः भारत आने पर 3 जून, 1947 ई. को उन्होंने "माउन्टबेटन योजना", जो जनसाधारण में "मनबाटन योजना" के नाम से प्रसिद्ध है, प्रस्तुत की। इसकी मुख्य बातें इस प्रकार थीं- 1. वर्तमान परिस्थितियों में भारत के विभाजन से ही समस्या सुलझ सकती है। अतः हिन्दुस्तान को दो हिस्सों, भारतीय संघ और पाकिस्तान में बांट दिया जायेगा। संविधान सभा द्वारा पारित संविधान भारत के उन भागों में लागू नहीं होगा, जो इसे मानने के लिए तैयार नहीं हैं। 2. बंगाल, पंजाब एवं असम में विधानमण्डलों के अधिवेशन दो भागों में किये जायेगें। एक भाग में उन ज़िलों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगें, जहाँ मुसलमानों की बहुलता है और दूसरे में उन ज़िलों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगें, जहाँ मुसलमानों अल्पसंख्या में है। दोनों यह निर्णय स्वयं लेंगे कि उन्हें भारत में रहना है या पाकिस्तान में। 3. उत्तर-पश्चिमी प्रांत में जनसंग्रह द्वारा यह पता लगाया जायेगा कि वे किस भाग, भारत या पाकिस्तान, में रहना चाहते हैं। 4. असम के सिलहट ज़िले के लोगों की भी राय जानने के लिए जनमत संग्रह का सहारा लिया जायेगा। 5. पंजाब, बंगाल व असम के विभाजन के लिए एक सीमा आयोग की नियुक्ति होगी, जो उक्त प्रान्तों की सीमा निश्चित करेगा। 6. देशी रियासतों से भी 15 अगस्त, 1947 ई. से ब्रिटिश सर्वोच्चता हटा ली जायेगी तथा उन्हें भारत या पाकिस्तान में मिलने की पूर्ण स्वतंत्रता होगी। भारतीय स्वतंत्रता विधेयक 'माउन्टबेटन योजना' के आधार पर ही 'भारतीय स्वतंत्रता विधेयक' ब्रिटिश संसद में 4 जुलाई, 1947 ई. को प्रस्तुत किया गया, जिसे 18 जुलाई को स्वीकृत मिली। इस विधेयक के प्रमुख प्रावधान इस प्रकार थे- 1. प्रस्ताव के आधार पर भारत और पाकिस्तान नाम के दो अधिराज्यों को स्वतंत्र कर दिया जायगा। 2. दोनों अधिराज्य अपनी-अपनी संविधान सभा का गठन करेंगे। 3. भारत और पाकिस्तान के पास राष्ट्रमण्डल से अलग होने का पूर्ण अधिकार होगा। 4. नया संविधान बनने तक संविधान सभा के सदस्य ही विधानमण्डल के रूप में कार्य करेंगे और साथ ही उचित संशोधनों के साथ 1935 ई. के अधिनियम के द्वारा ही शासन कार्यों का संचालन किया जायेगा। 5. दोनों अधिराज्यों के लिए एक-एक गवर्नर-जनरल की व्यवस्था की गई। 6. जब तक नये संविधान के अन्तर्गत प्रान्तों में चुनाव नहीं होता, तब तक पुराना विधानमण्डल ही प्रान्तों में कार्य करेगा। योजना की पुष्टि महात्मा गांधी की सलाह पर 'कांग्रेस कार्यकारिणी समिति' ने 12 जून को तथा 'कांग्रेस महासमिति' ने 14 जून ओर 15 जून, 1947 ई. को दिल्ली में हुई बैठक में 'माउण्टबेटन योजना' की पुष्टि कर दी। गोविंद वल्लभ पंत ने विभाजन की योजना की पुष्टि करते हुए कहा कि "आज हमें पाकिस्तान या आत्महत्या में से एक को चुनना है। देश की स्वतंत्रता और मुक्ति पाने का यही एक मात्र रास्ता है। इससे भारत में एक शक्तिशाली संघ की स्थापना होगी।" 'माउन्टबेटन योजना' का पुरुषोत्तम दास टंडन ने विरोध किया था। देश का विभाजन 'माउन्टबेटन योजना' स्वीकार करने के बाद देश के विभाजन की तैयारी आरंभ हो गयी। बंगाल और पंजाब में ज़िलों के विभाजन तथा सीमा निर्धारण का कार्य एक कमीशन के अधीन सौंपा गया, जिसकी अध्यक्षता 'रेडक्लिफ़' ने की। इस प्रकार 15 अगस्त, 1947 ई. को भारत तथा पाकिस्तान नाम के दो नये राष्ट्र अस्तित्व में आ गये। लॉर्ड माउन्ट बेटन द्वारा प्रस्तुत की गई योजना को कांग्रेस के अन्दर जहाँ मौलाना अबुल कलाम आज़ाद एवं पुरुषोत्तम दास टण्डन, सिंध कांग्रेस के नेता चौथराम गिडवानी, पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. किचलू तथा मौलाना हफ़ीजुर्रहमान आदि ने अस्वीकार कर दिया, वहीं महात्मा गांधी, गोविन्द बल्लभ पंत, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, जे.बी. कृपलानी आदि ने अनमने ढंग से तथा परिस्थितियों की गम्भीरता को देखते हुए इसे स्वीकार कर लिया। 'मुस्लिम लीग' के नेता मुहम्मद अली जिन्ना ने पहले अस्त-व्यस्त पाकिस्तान को स्वीकार करने से मना कर दिया, किन्तु माउन्टबेटन के दबाव में उसे भी योजना को स्वीकार करना पड़ा। विभाजन का विरोध वायसराय के सचिवालय में उच्च पद पर कार्यरत वी.पी. मेनन ने भारत के दो भागों में विभाजन की योजना बनाई। देश के विभाजन का विरोध करते हुए मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने कहा कि "मैं बंटवारे के ख़िलाफ़ हूँ। मुझे यह देखकर अफ़सोस है कि नेहरू और पटेल ने हार मंजूर कर ली। यदि आप (गांधी जी) ने भी इसे स्वीकार कर लिया तो मुझे डर है कि हिन्दुस्तान का सर्वनाश हो जायेगा।" बंटवारे के बारे में गांधी जी ने कहा कि "भारत का विभाजन मेरे शव पर होगा। जब तक मैं ज़िन्दा हूँ, भारत के दो टुकड़े नहीं होने दूँगा। यथा-संभव मैं कांग्रेस को भी भारत का बंटवारा स्वीकार नहीं करने दूंगा।" गांधी जी का प्रयास 2 अप्रैल को माउन्ट बेटन से एक मुलाकात में महात्मा गांधी ने व्यथित मन से कहा कि आप जिन्ना को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करें, कम से कम इससे देश का विभाजन तो रुक जायेगा, परन्तु गांधी जी के इस सुझाव का जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभ भाई पटेल ने जमकर विरोध किया। गांधी जी इससे इतने मर्माहत हुए कि इनकी अधिक जीने की इच्छा ही समाप्त हो गई। गांधी जी ने अकेले ही साम्प्रदायिकता के ख़िलाफ़ लड़ाई जारी रखी। उनके प्रयासों की प्रशंसा में माउन्ट बेटन ने उन्हें "वन मैन बाउंडरी फ़ोर्स" कहा। अन्ततः महात्मा गांधी ने भी देश में बढ़ रही साम्प्रदायिकता की लहर से निराश होकर विभाजन को मान लिया। भारत विभाजन की स्थिति में ख़ान अब्दुल गफ़्फ़ार ख़ान ने घोषणा की कि उत्तर पश्चिमी सीमांत प्रांत स्वतंत्र प्रभुसत्ता सम्पन्न पख्तुनिस्तान बनेगा, क्योंकि वे पाकिस्तान में मिलना नहीं चाहते थे और कांग्रेस ने उन्हें भेड़ियों के आगे डाल दिया है। जवाहरलाल नेहरू का कथन 14 अगस्त, 1947 ई. की रात पंडित जवाहर लाल नेहरू ने संविधान सभा को सम्बोधित करते हुए कहा- "वर्षों पहले हमने किस्मत के साथ बाज़ी लगाई थी। अब समय आ गया है कि हम अपनी प्रतिज्ञा को पूरी तरह न सही काफ़ी हद तक पूरा करें। मध्यरात्रि में जब सारी दुनिया सो रही होगी, भारत नयी जीवन स्वतंत्रता लेकर जागेगा। एक क्षण, जो इतिहास में बिरले ही आता है, ऐसा होता है, जब हम पुरातन से नूतन की ओर जाते है। जब एक युग समाप्त होता है, जब राष्ट्र की बहुत दिनों से दबी आत्मा को वाणी मिल जाती है। यह उपयुक्त है कि हम इस पवित्र क्षण में भारत तथा उसकी जनता की सेवा में और उससे भी अधिक बडेे मानवता के उद्देश्य की पूर्ति के लिए अपने आप को अर्पित करें। आज हम एक दुर्भाग्यपूर्ण अवधि को समाप्त कर रहे हैं और भारत को अपने महत्व का एक बार फिर अहसास हो रहा है। आज हम जिस उपलब्धि को मना रहे हैं, वह निरन्तर प्रयास की उपलब्धि है, जिसके परिणामस्वरूप हम उन प्रतिज्ञाओं को पूरा कर सके, जिन्हें हमने कितनी बार लिया है।" जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री एवं लॉर्ड माउन्ट बेटन प्रथम गवर्नर-जनरल बने तथा पाकिस्तान का गवर्नर-जनरल मुहम्मद अली जिन्ना एवं प्रधामंत्री लियाकत अली को बनाया गया।
Q.5 असहयोग आंदोलन महात्मा गांधी ने बंद कर दिया था क्यों ?

A) गांधी इरविन समझौते के कारण

B) चौरी-चौरा में हिंसा के कारण

C) खिलाफत मुद्दा तुर्की में खलीफा के कार्यालय के उन्मूलन के कारण असफल रहा

D) सरकार द्वारा मांग मुश्किल से स्वीकार किए जाते थे

Ans. B
असहयोग आन्दोलन महात्मा गांधी के नेत्तृत्व मे सितम्बर, 1920 [1] मे चलाया गया था। 4 फ़रवरी 1922 को चौरी चौरा में भारतीयों द्वारा बिट्रिश सरकार की एक पुलिस चौकी को आग लगा कर उसमें छुपे हुए 22 पुलिस कर्मचारियों को जिन्दा जला के मार डाला था तब गांधी ने कहा था कि हिंसा होने के कारण असहयोग आन्दोलन उपयुक्त नहीं रह गया है और इसे वापस ले लिया था। 1917 का अधिकांश समय महात्मा गाँधी को किसानों के लिए काश्तकारी की सुरक्षा के साथ-साथ अपनी पसंद की फ़सल उपजाने की आजादी दिलाने में बीता। अगले वर्ष यानी 1918 में गाँधी जी गुजरात के अपने गृह राज्य में दो अभियानों में संलग्न रहे। सबसे पहले उन्होंने अहमदाबाद के एक श्रम विवाद में हस्तक्षेप कर कपड़े की मिलों में काम करने वालों के लिए काम करने की बेहतर स्थितियों की माँग की। इसके बाद उन्होंने खेड़ा में फ़सल चौपट होने पर राज्य से किसानों का लगान माफ़ करने की माँग की। चंपारन, अहमदाबाद और खेड़ा में की गई पहल से गाँधी जी एक ऐसे राष्ट्रवादी के रूप में उभरे जिनमें गरीबों के लिए गहरी सहानुभूति थी। इसी तरह ये सभी स्थानिक संघर्ष थे। इसके बाद 1919 में औपनिवेशिक शासकों ने गाँधी जी की झोली में एक ऐसा मुद्दा डाल दिया जिससे वे कहीं अधिक विस्तृत आंदोलन खड़ा कर सकते थे।
Q.6 "स्वराज पार्टी" के निर्माण के पीछे कारण क्या था?

A) इस पार्टी के संस्थापक ब्रिटिश कांग्रेस के खिलाफ कोई कदम उठाना नहीं चाहते थे क्योंकि वे आगामी चुनावों में भाग लेना चाहते थे

B) पार्टी के विचार पूरी तरह से भिन्न थे

C) वे विधानसभा चुनाव में भाग लेके असहयोग आंदोलन जारी रखना चाहते थे

D) कांग्रेस विचारधारा से उनके विश्वास उठ गया था

Ans. C

Q.7 निम्नलिखित में से कौन "चिहलगानी" के विनाश के कारण थे जो  शक्तिशालियों का समूह था ?

A) इल्तुतमिश

B) रजिया सुल्तान

C) बलबन

D) कुतुब दीन-ऐबक

Ans.C

Q.8 असहयोग आंदोलन बाद के चरण में, अपनी वांछित छाप छोड़ नहीं सका, क्यों?

A) लोग उसी उत्साह के साथ भाग नही ले रहे थे जो उत्साह अपने प्रारंभिक चरण के दौरान दिखाया गया था 

B) आंदोलन वापस लेने का गांधी जी के एकतरफा निर्णय जो कांग्रेस में विभाजन किया

C) लंबे समय तक ब्रिटिश माल और सेवाओं का उपयोग करना असंभव था क्योंकि राष्ट्रीय माल और सेवाएं व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं थी

D) आंदोलन पर गांधी जी का प्रभुत्व.

Ans.C 

Q.9 कैसे जनरल डायर ने बाग में खुले फायरिंग के खिलाफ अपने कदम को न्यायसंगत बताया ?

A) सिर्फ एक नैतिक प्रभाव उत्पन्न करना चाहते थे

B) कानून के आदेशों का पालन कर रह थे

C) किसी भी तट पर ब्रिटिश सरकार की सेवा करना कर्तव्य है

D) भारतीयों और उनके किसी भी ब्रिटिश विरोधी कदम को बर्दाश्त नहीं किया जा सका.

Ans. A

Q.10 सविनय अवज्ञा आंदोलन के समर्थन में खान अब्दुल गफ्फर खान द्वारा आयोजित रेड शर्ट्स के मुख्य कार्यक्रम थे :

A) आतंकवादी और क्रांतिकारी गतिविधियों की तर्ज पर आगे बढ़ना

B) कांग्रेस कार्यक्रम को प्रचारित करना

C) उत्तर पश्चिमी सीमा के हिस्से में सरकार के सैन्य अभियानों का विरोध करना

D) एक अर्ध सैनिक संगठन की स्थापना करना

Ans. B

सविनय अवज्ञा आन्दोलन के अंतर्गत चलाये जाने वाले कार्यक्रम निम्नलिखित थे-
	नमक क़ानून का उल्लघंन कर स्वयं द्वारा नमक बनाया जाए।
	सरकारी सेवाओं, शिक्षा केन्द्रों एवं उपाधियों का बहिष्कार किया जाए।
	महिलाएँ स्वयं शराब, अफ़ीम एवं विदेशी कपड़े की दुकानों पर जाकर धरना दें।
	समस्त विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करते हुए उन्हें जला दिया जाए।
	कर अदायगी को रोका जाए।

Q.11 रौलैट अधिनियम के संबंध में निम्नलिखित बयानों पर विचार करें:

1) यह भारतीय सदस्यों से मजबूत प्रतिरोध के बाद भी शाही विधान परिषदों से पारित किया गया 

2) भारत में यह "काले कानून" के नाम से जाना जाता है

3) यह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों को रोकने के लिए शुरू किया गया

4) जलिआबाला नरसंहार, इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन का नतीजा था.

Which among above are correct?

A) 2 & 4

B) 1,2,3,4

C) 2 & 3

D) All are correct

Ans. D





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